Yateendra A log of everyday life

क्यों कोरोना वायरस की लड़ाई आप पर निर्भर करती है

मार्च 11, 2020 को विश्व स्वास्थ संगठन (WHO) ने एक घोषणा की “पिछले 2 सप्ताह में चीन के बाहर COVID-19 के मरीज़ों की संख्या 13 गुना बढ़ गया है। COVID-19 को अब एक महामारी कहा है” कोरोना वाइरस या COVID-19 पहले से ही कई देशों में फैल चुकी है। और यह बाक़ी देशों (जहां ये तेज़ी से फैल रही है) के लिए एक बड़ी चेतावनी है। कुछ ही दिनों और सप्ताहों में इसके मरीज़ों व मृतकों की संख्या में तेज़ी से इज़ाफ़ा हो रही है। अब इस महामारी का फैलाव रोका नहीं जा सकता, परंतु हम इसे धीमा कर सकते है। इसके लिए हमें अभी से कदम उठाने होंगे। COVID-19 से संक्रिमित लोगों को अक्सर बुख़ार, चक्कर या खांसी होती है। दर्द जैसे अन्य छोटे लक्षण भी होते है परंतु वो कभी कभी ही होते है। परंतु इन लक्षणों की गम्भीरता काफ़ी अलग अलग होती है। और कुछ लोग जो इससे संक्रिमित होते है, उन्मे कोई लक्षण सामने नहीं आता। जैसे ही लोगों को बीमार महसूस होना शुरू होता है, वो दूसरों के संक्रमण के लिए ख़तरा बन जाते है। हर अस्पताल में मरीज़ों के लिए सीमित बिस्तर होते है। मान लीजिए की ये आपके स्थानीय अस्पताल में बिस्तरों की संख्या इतनी है। कुछ बिस्तर पहले से ही सड़क दुर्घटना जैसे अन्य प्रकार के इलाज के लिए भरे होंगे। या दौरा पड़ने वाले मरीज और ये बिंदु एक स्वस्थ व्यक्ति देखता है जो की कहीं बाहर जा रहा है। वो मेट्रो से ऑफिस जाता है और रस्ते में उसको COVID -19 का संक्रमण हो जाता है। परंतु उन्हें तुरंत बीमार महसूस नहीं होगा और कुछ दिनों तक वो साधारण महसूस करेगा क्योकि उसका पता नहीं है की वो संक्रमित है वो बास्केटबॉल देखने स्टेडियम जाता है वहाँ वो 2-3 और लोगों को संक्रिमित कर देता है । वहाँ किसी वृद्ध को भी संक्रमण हो सकता है।

गम्भीर बीमारी होने पे वो अस्पताल जाएँगे। पर बाक़ी लोग जिन्हें संक्रमण हुआ पर कोई बीमारी नहीं हुई, वो अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी जीते रहेंगे। मेट्रो में, ऑफ़िस में, काम के बाद बाहर घूमते हुए और भी लोगों को संक्रमित करते रहेंगे। इसने में लोगों को अस्पताल जाना पड सकता है। कुछ ही समय में ये क्रिया काफ़ी बढ़ जाएगी और अस्पताल जाने वाले लोगों की संख्या भी। कुछ ही समय में सारे अस्पताल भर जाएँगे और संकट शुरू हो जाएगा। जिन लोगों को COVID-19 की गम्भीर समस्या है, उन्हें समय पे इलाज नहीं मिल पाएगा और जिन लोगों की ज़ाने बच सकती थी, वो मर जाएँगे। और बाक़ी बीमारियों की वजह से भी लोग मरेंगे जिन्हें इलाज नहीं मिल पाया। इन गंभीर्र समस्यों की वृद्धि से काफ़ी जाने जाएँगी जो बचायी जा सकतीं थी। बहुत सारी मृत्युएँ सिर्फ़ इस वजह से हुई कि लोग अस्पताल नहीं जा पाए। ये वृद्धि सिर्फ़ गंभीर बीमारी वाले मामलों में हुई, लेकिन ये उन लोगों की वजह से फैली जो खुद स्वस्थ रहे और सार्वजनिक क्षेत्र में बीमारी फैलाते रहे। इसका मतलब की ये बेमतलब की ज़ाने गयीं उन्हें यहीं लोग बचा सकते थे। और ये लोग हम सब है। संक्रमण को धीमा करने के लिए ऐसे वर्त्ताब करो जैसे आपको पहले से ही बीमारी हो। सार्वजनिक यातायात, ऑफ़िस, भीड़भाड़ और यहाँ तक कि छोटी सामाजिक मेलमिलाप से भी बचें। इससे आप खुद भी इस बीमारी से बचेंगे और फैलाएँगे भी नहीं। इसे सोशल डिस्टेंसिंग कहते है।

अगर हम पर्याप्त लोग ये करें तो इससे ये वाइरस काफ़ी धीमी गति से फैलेगा। समय के साथ साथ काफ़ी लोग इससे संक्रमित होंगे, पर एक साथ प्रतिदिन कम ही गम्भीर मामले अस्पताल में आएँगे और इससे अस्पताल में कभी भी संसाधनो की कमी नहीं रहेगी। इससे सभी लोगों को बेहतर इलाज मिलेगा और कम लोगों की मौत होगी। COVID-19 इन 2 तरीक़ों में से एक का रुख़ लेगी। लेकिन यह तभी सम्भव है जब हम सब मिलकर अपना पात्र निभाएँ। और इसलिए विशेषज्ञ लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग और घर पे बने रहने की अपील कर रहे है। जितना ज़्यादा हो सके घर पे रहिए। बात ये नहीं है की आपको कोरोना वाइरस होगा की नहीं, पर कि कब होगा। इसका मतलब है कि ये ज़िंदगी और मौत का अंतर बन सकता है और शायद इनमे कोई आपका चहेता हो। और इसके लिए हमें अभी से कदम उठाने होंगे। Reference ~ Tv, Internet